Ramesh Pokhriyal ‘Nishank’

Dr. Ramesh Pokhriyal 'Nishank'

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भागोंवाली

एक परिवार के अन्तद्र्वन्द और टूटते- विखरते रिश्तों की मार्मिक कहानी


           डाॅ0 रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ जितने प्रखर और संवेदनशील राजनेता और प्रशासक हैं, उतने ही सपफल और प्रखर कथाकार एवं कवि भी हैं। सच कहूँ, तो डाॅ0 ‘निशंक’ जीवन-मूल्यों के सशक्त पक्षध्र के साथ-साथ अत्यन्त कुशल चितेर भी हैं।
    

          प्रस्तुत उपन्यासिका ‘भागोंवाली’ भी डाॅ0 ‘निशंक’ की शब्द साध्ना का ऐसा मनोरम पुष्प गुच्छ है, जिसमें पर्वतीय समाज के साथ-साथ नारी के त्याग, समर्पण और ममत्व की नयनाभिराम झाँकियाँ पाठकों को देखने का सुअवसर मिलेगा। 
  

           समर्पित शिक्षक शास्त्राी जी की सहध्र्मिणी ‘‘अम्मा’ को पहाड़ के लोग इसलिए ‘भागोंवाली’ नाम से पुकारते हैं, चूंकि ‘अम्मा’ चार-चार ‘बेटों’ की माँ है। ‘अम्मा’ ही क्या, स्वयं शास्त्राी जी भी अपने ‘चार बेटों’ को ही अपनी सबसे बड़ी पूंजी मानकर गर्वित हैं, लेकिन दैवयोग से सबको ज्ञान देने वाले शास्त्राी जी के अप्रत्याशित निःध्न के बाद ‘भागोंवाली अम्मा’ का बँटवारा कर देने वाले इन पुत्रों की मर्मभेदी कथा लिखकर डाॅ0 ‘निशंक’ ने बहुत बड़ा सन्देश दिया है। 
  

           ‘भागोंवाली अम्मा’ की व्यथा-कथा घोर स्वार्थ के बीच उलझी ममता की हृदयस्पर्शी कथा के साथ-साथ बेटों को ‘पूंजी’ मानने वाले समाज के मुँह पर करारा तमाचा भी है। यह रचना कथाकार डाॅ0 ‘निशंक’ के हृदय का दर्पण है, जो पाठकों की आँखों से गंगा बनकर बरसेगी।