Ramesh Pokhriyal ‘Nishank’

Dr. Ramesh Pokhriyal 'Nishank'

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एक दिन नेपाल में

          विश्रुत कवि एवं कथाकार डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ लिखित पुस्तक ‘नेपाल यात्रा’ हिन्दी में यात्रावृत्त लेखन की एक चिरस्मरणीय अद्वितीय कृति है। इस पुस्तक की शैली वर्णनात्मक और इतिहास तत्व पर अनुसंध्त्सिु दृष्टि डालती है। भगवती जनक नन्दिनी सीता  जी की जन्मभूमि ‘मिथिला’ इसी नेपाल की पुण्यधरा पर विराजमान है। भगवान बुद्ध की जन्मस्थली ‘लुम्बिनी’ यहीं है। यहीं हैं अवलोकितेश्वर के रूप में पूजे जाने वाले भगवान पशुपतिनाथ।

          डॉ. निशंक जी ने बड़े ही प्रभावपूर्ण शब्दों में नेपाल के इतिहास को क्रमशः प्रस्तुत किया है। यह पुस्तक भारत और नेपाल के सांस्कृतिक और राजनीतिक पक्षों का सम्यक् परिचय देती है तथा शोध् छात्रों एवं पाठकों के लिए अनुसंधन के गवाक्ष खोलती है।

देवभूमि उत्तराखण्ड के यशस्वी पूर्व मुख्यमंत्री एवं वर्तमान में हरिद्वार संसदीय क्षेत्र के लोकप्रिय सांसद डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ के इस अनुपम ग्रंथ ‘‘मंगलकारी मेरी नेपाल यात्रा’’ को मैंने आद्योपान्त अक्षरशः अत्यन्त मनोयोग से पढ़ा है। मैं दावे से कह सकता हूँ कि भारतवर्ष के अभिन्न मित्र राष्ट्र ‘नेपाल को पूरी तरह जानने-समझने की ‘कुंजी’ डॉ. ‘निशंक’ का यह यात्रा ग्रंथ है।

          हिन्दी साहित्य को अनेक स्मरणीय उपन्यास, कथा-संग्रह, काव्य-संग्रह, निबंध्-संग्रह और महनीय कृति ‘‘प्रलय के बीच’’ देने वाले सरस्वती के वरद् पुत्र डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ की यह अनुपम कृति हिन्दी के ‘‘यात्रा-साहित्य’’ में एक उल्लेखनीय ग्रंथ माना जाएगा। डॉ. ‘निशंक’ ने नेपाल को जिस ‘दृष्टि’ से देखा, वह एक सहृदय साहित्यसाधक की तो है ही, साथ ही, वह एक ‘राष्ट्रवादी राजनेता, प्रखर पत्राकार, समर्पित पुरातत्ववेत्ता और आत्मीयता से परिपूर्ण शिक्षक की ‘दृष्टि’ भी रही है, इसलिए यह ग्रंथ एक ‘‘कोरा यात्रा वर्णन’’ न रहकर, संप्रभुता संपन्न राष्ट्र ‘नेपाल’ के इतिहास, संस्कृति, समाज, धर्म, राजनीति, अर्थव्यवस्था और शैक्षिक परिदृश्य को जानने का माध्यम बन गया है। इसे अगर केवल ‘‘यात्रा वर्णन’ कहा जाए, तो मेरी दृष्टि में यह अन्याय ही होगा।

          डॉ. ‘निशंक’ का यह यात्रा-ग्रंथ तो हिमालयी राष्ट्र नेपाल को समग्ररूप से जानने का लक्ष्य लेकर पढ़ने वाले जिज्ञासुओं के लिए संजीवनी का काम करेगा। मैं गर्वित मन से डॉ. ‘निशंक’ को यह ग्रंथ लिखने के लिए बधइयाँ देता हूँ और आशा करता हूँ कि यह ग्रंथ भारत-नेपाल-मैत्री को और भी प्रगाढ़ बाने में सक्षम