Ramesh Pokhriyal ‘Nishank’

Dr. Ramesh Pokhriyal 'Nishank'

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पल्लवी

नारी के शौर्य, साहस और समर्पण की गाथा है 'पल्लवी'

 

          कवि एवं कथाकार डॉ0 रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ द्वारा रचित उपन्यास ‘पल्लवी’ वस्तुतः हिन्दी-कथा साहित्य की अनूठी कथाकृति के रूप में समादृत किया जाएगा। इसका सब से बड़ा कारण यह है कि देवभूमि उत्तराखण्ड के गढ़वाल मण्डल की संस्कृति के साथ-साथ उच्चतर एवं श्रेष्ठ जीवन-मूल्यों की सजीव अभिव्यक्ति ‘पल्लवी’ उपन्यास का प्राणतत्व है।

          मैं गर्व से कह सकता हूँ कि डॉ0 ‘निशंक’ की यह कथाकृति ‘पल्लवी’ सचमुच पर्वतीय नारी के अदम्य शौर्य, अटूट साहस एवं निष्ठापूर्ण समर्पण की अनूठी गाथा है, जो एक ओर तो पाठक को झकझोर कर रोमांचित करती है, तो दूसरी ओर जीवन की प्रेरणा देकर उपकृत करती है।

          कथाकार के रूप में जीवन-मूल्यों के साध्क रचनाकार डॉ0 रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने जहाँ अपने उपन्यास की कथावस्तु में गढ़वाल की भौगोलिकता एवं सामाजिक उपस्थिति के माध्यम से ‘आंचलिकता’ का बेजोड़ रंग भर दिया है, वहीं अत्यन्त सहज, जीवन्त और प्रेरक पात्रों की सृष्टि करते हुए अपने इस उपन्यास को भव्यता भी प्रदान कर दी है।

          कथा-नायक ‘ध्रुव’ तो जैसे स्वयं रचनाकार के जीवन मूल्यों का सजीव दर्पण ही बन गया है। गाँव का मेधवी, परिश्रमी, लगनशील और सबसे बढ़कर संकल्प ध्नी कथा-नायक ‘ध्रुव’ अपनी कविताओं के माध्यम से सहृदय पाठक के अन्तःकरण में बस जाता है। ‘ध्रुव’ डॉ0 ‘निशंक’ के इस उपन्यास का आदर्श युवा है, जिसमें पाठक को रचनाकार की सहज छवि दिखने लगती है।

          डॉ0 निशंक के इस उपन्यास ‘पल्लवी’ का कथा-पफलक उत्तराखण्ड के ग्रामीण-परिवेश से महानगरीय-परिवेश तक फैला हुआ है, जिसके माध्यम से कथाकार ने अत्यन्त रोचक एवं सार्थक कथा का अत्यन्त रोचक एवं सपफल ताना-बाना बुना है।

          ‘पल्लवी’ उपन्यास की सबसे बड़ी विशेषता इसके कथानक में आदर्श एवं यथार्थ का अनूठा चित्राण किया जाना मैं मानता हूँ। एक ओर जहाँ कथा-नायिका पल्लवी और कथा-नायक ‘ध्रुव’ के माध्यम से कथाकार डॉ0 निशंक ने उच्च्तर जीवन-मूल्यों की सशक्त अभिव्यक्ति कराते हुए आदर्श चरित्रों की सृष्टि की है, वहीं कैप्टन किशन की पत्नी बिन्दु और दगाबाज वकील के चरित्रों की सृष्टि करके समाज के कड़वे यथार्थ का चित्राण बखूबी किया है।

          एक धनी और अहंवादी पिता रमाकान्त की बेटी पल्लवी निःसंदेह देवभूमि की साहसी, समर्पित, निर्भीक और संकल्प की धनी महिला की छवि पाठक के अन्तःकरण में प्रतिष्ठित कर देती है, तो चरित्रावान ‘कुन्ती’ के रूप में डॉ0 निशंक एक प्राणवान नारी-पात्रा की सृष्टि करके पाठक को अभिभूत कर देते हैं।

          डॉ0 निशंक सोद्देश्य लिखने वाले रचनाकार के रूप में जाने जाते हैं। ‘पल्लवी’ उपन्यास का प्रत्येक पात्रा कथाकार डॉ0 निशंक के उच्चादर्शों का प्रतीक बन गया है, लेकिन ‘श्रवण’ के माध्यम से वे ‘विकलांगता’ के क्रूर अभिशाप से लड़कर ‘पल्लवी’ के माध्यम से जीवन्त सामाजिक सन्देश देने में जो सपफलता प्राप्त करते है,। वह पाठक के हृदय को अभिभूत कर देती है।

          पल्लवी के चरित्रा की दृढ़ता और संकल्प-शक्ति देखकर जब उसके ‘अहंवादी’ और दौलत के नशे में चूर पिता का हृदय-परिवर्तन होता है, तो पाठक डॉ0 निशंक की लेखन-प्रतिभा का लोहा मानकर गद्गद् हो उठता है।

          ‘पल्लवी’ उपन्यास का कथा नायक ‘ध्रुव’ निश्चय ही पर्वतीय युवाओं का जीवन्त आदर्श बन गया है। सच तो यह है कि ‘ध्रुव’ के रूप में बार-बार कथाकार डॉ0 निशंक की छवि ही इस उपन्यास में पाठक देखने लगता है, तो अनिर्वचनीय सुख का अनुभव पाठक को होता है। कथा-नायक ‘ध्रुव’ की कविताओं में जो प्रेरणा का अमृत और संजीवनी शक्ति है, वहीं कथा-नायक ‘ध्रुव’ को अविस्मरणीय पात्रा बना देती है।

          मेरा विश्वास यह है कि जीवन-मूल्यों के सजग साधक कथाकार डॉ0 रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ का यह उपन्यास उनके पूर्व प्रकाशित उपन्यासों ‘बीरा’, ‘निशान्त’, ‘पहाड़ से ऊँचा’ और ‘मेजर निराला’ आदि जैसा ही लोकप्रिय होगा, चूँकि इस में भी डॉ0 ‘निशंक’ के जीवनादर्शों तथा देवभूमि की सांस्कृतिक एवं सामाजिक मर्यादाओं को कथा का आधर बनाया गया है।

          ‘पल्लवी’ उपन्यास डॉ0 रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ की रचना - धर्मिता के साथ-साथ कवि-हृदय की भावुकता का सजीव दर्पण बनकर आप सबको आनन्दित करेगा।