Ramesh Pokhriyal ‘Nishank’

Dr. Ramesh Pokhriyal 'Nishank'

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जीवन पथ में


          श्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ जी की काव्य यात्रा युवकों के लिये प्रेणादायक है। श्री ‘निशंक’ एक अध्यवसायी नव-युवक हैं, जो सार्वजनिक जीवन में सामाजिक-सांस्कृतिक कार्यों में, सक्रिय हैं लेकिन इन सब से आगे वे एक सहृदय कवि हैं। कवि ‘निशंक’ की काव्य-साध्ना का नवीनतम पुष्प यह काव्य-संग्रह है।
          ‘जीवन पथ में’ नाम से प्रकाश्य संग्रह में ‘निशंक’ जी की प्रायः छोटी कवितायें हैं। छोटी कवितायें अपने आकार में भले ही लघु हों, उनका प्रभाव-विस्तार व्यापक होता है। इसका प्रमुख कारण है कविताओं का कसाव। कम से कम शब्दों में अध्कि से अध्कि भावों और विचारों की अभिव्यक्ति करने मंे कम ही लोग सपफल हो पाते हैं। इस कवि की ये कवितायें पढ़ कर लगता है कि कवि अभिव्यक्ति के इस कौशल के बहुत निकट है। लम्बी काव्य साध्ना के बाद यह क्षमता विकसित हो पाती है। कवि भाषण, एकालाप, अनावश्यक विस्तार और बड़बोलेपन का शिकार नहीं है। ये बातें वास्तव मे कविता के लिय घातक हुआ करती हैं, इस बात का ‘निशंक’ जी को भान है।
          सहजता कवि की सबसे बड़ी विशेषता है। यह उसके व्यक्तित्व से आती है। ‘निशंक’ जी जैसे सहज-सरल व्यक्ति हैं, उनकी कवितायें भी वैसे ही सहज-सरल और सीध्ी हैं, सापफ है। दूसरी बात सारी कवितायें व पढ़ कर लगता है कि उनकी कवितायें मुक्ति की, समर्पण की, कर्म एवं जीवन की कवितायें हैं। उनकी कविताओं का यह गुण उन्हें अन्य समवयस्क कवियों से अलग करता है। उनकी कविताओं में जीवटता है, अलग राह बनाने की बेचैनी भी। लेकिन, अलग एकाकी चलने की स्वार्थपरक नीति के वे प्रबल विरोध्ी हैं। सभी को साथ लेकर चलने की बात वे कहते हैं। वे आज के जीवन के संघर्षों, विडम्बनाआंे, द्वन्द्वों को समझते हैं इसलिए आकाश की बात नहीं करते, ध्रती की बात करते हैं।
          मुझे चाहिए था कि इन सब बातों के लिए मैं उनकी कवितायें उदाहरण रूप में साथ-साथ उद्धृत करता, लेकिन मुझे लगा कि ऐसा करने में तो उनका पूरा संग्रह ही उद्धृत हो जाता। पिफर भी एक उदाहरण अवश्य दूंगा -

तोड़ सको तो तोड़ो बन्ध्न,
जो तुमको जकड़े है ।
कर्म करो वह कारा तोड़ो,
जो तुमको पकड़े है ।

संभवतः यही ‘निशंक’ जी का संदेश है।
          श्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ अपनी कविताओं से हिन्दी कविता का श्री भण्डार भरेंगे, समाज में नयी चेतना जागृत करेंगे और निरन्तर अविचल अपने काव्य मार्ग पर अग्रसर होते रहेंगे जो शिल्प अभी सध नहीं है, उसे साधेंगे और अपनी कविताओं में अपने भावों, विचारों, अनुभूतियों को नवीन शिल्प में बांधेंगे।