Ramesh Pokhriyal ‘Nishank’

डॉ रमेश पोखरियाल निशंक

रमेश पोखरियाल निशंक Ministry of Human Resource Development

डॉ रमेश पोखरियाल निशंक Minister of Human Resource Development

Political Life

Ministry of Education

          वर्तमान में केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री, भारत सरकार हैं और लोकसभा में उत्तराखंड के हरिद्वार संसदीय निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं।

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Member of Parliament

वर्ष 2014 में 16वी लोकसभा से हरिद्वर क्षेत्र सें सांसद चुने गए।

  • वर्ष 2014 में हरिद्वार लोकसभा क्षेत्र से सांसद निर्वाचित।
  • वर्ष 2014 से 2019 तक लोकसभा की सरकारी आश्वासन समिति के सभापति।
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Former Chief Minister

          2009 से 2011 तक उत्तराखंड के पाँचवे मुख्यमन्त्री रहे। डॉ0 निशंक ने मुख्य्मन्त्रित्व  काल में राजनैतिक कौशल, ज्ञान और ध्वनि समन्वय कौशल की सहायता से उत्तराखंड राज्य में हरिद्वार और उधम सिंह नगर को शामिल करने जैसे जटिल और संवेदनशील मुद्दों को सुलझाया। अंतरराष्ट्रीय फोरम में हिमालयी संस्कृति को लाने के लिए अनगिनत सफल प्रयास किए। राज्य से संचालित करने के लिए लघु उद्योग क Read More

Former State Minister

          डॉ0 रमेश पोखरियाल 'निशंक' भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ सदस्य एवं एक भारतीय राजनीतिज्ञ हैं।1991 में वे प्रथम बार उत्तर प्रदेश विधानसभा के लिए कर्णप्रयाग निर्वाचन-क्षेत्र से चुने गए थे। इसके बाद 1993 और 1996 में पुनः उसी निर्वाचन-क्षेत्र से उत्तर प्रदेश विधानसभा के लिए चुने गए। 1997 में वे उत्तर प्रदेश राज्य सरकार के उत्तरांचल विकास मंत्री बने और फिर संस्कृति पूर्त एवम्‌ ध Read More

  • संघ मानव संसाधन विकास मंत्री
  • सदस्य संसद
  • भूतपूर्व दार सर मंत्री
  • भूतपूर्व राज्य मंत्री

जीवनी

वर्ष 1959 मैं जन्मे डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ एक भारतीय राजनीतिज्ञ हैं, साथ ही एक प्रसिद्ध  लेखक और कवि भी हैं। पहली बार 1991 में तत्कालीन उ. प्र. की कर्णप्रयाग विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़कर उ. प्र. की विधानसभा में पदार्पण किया । उ. प्र. की विधानसभा में लगातार तीन बार विधायक और दो बार कैबिनेट मंत्री रहे ।  वर्तमान में केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री, भारत सरकार और हरिद्वार क्षेत्र से लोक सभा सांसद है, डॉ0 रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ जी  उत्तराखण्ड राज्य के पाँचवे मुख्यमंत्री रहे हैं।

          डॉ0 रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ मौलिक रूप से साहित्यिक विधा के व्यक्ति हैं। अब तक हिन्दी साहित्य की तमाम विधाओं कविता, उपन्यास, खण्ड काव्य, लघु कहानी संस्कृतिक, पर्यटन, यात्रा वृतांत, बाल कहानी और व्यक्तित्व विकास सहित कुल पांच दर्जन से अधिक पुस्तकें  प्रकाशित हो चुकी हैं। उनकी प्रकाशित कृतियों ने उन्हें हिन्दी साहित्य में सम्मानजनक स्थान दिलाया है। राष्ट्रवाद की भावना उनमें कूट-कूट कर भरी हुई है। यही कारण है कि उनका नाम राष्ट्रकवियों की श्रेणी में शामिल है। डॉ0 ‘निशंक’ की प्रथम रचना कविता संग्रह ‘समर्पण’ का प्रकाशन 1983 में हुआ था। तब से अब तक उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और आज भी तमाम व्यस्तताओं के बावजदू उनका लेखन जारी है। यह डॉ0 ‘निशंक’ के साहित्य की प्रासंगिकता और मौलिकता है कि अब तक उनके साहित्य को विश्व की कई भाषाओं जर्मन, अंग्रेजी, फ्रैंच, नेपाली सहित भारत की तमिल, तेलुगू, कन्नड़, मलयालम, मराठी, गुजराती, पंजाबी, संस्कृत आदि अनेक भाषाओं में अनूदित किया जा चुका है।

          इसके अलावा इनके साहित्य को मद्रास, चेन्नई तथा हैंबर्ग विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। उनके साहित्य पर अब तक शिक्षाविद् डॉ0 श्यामधर तिवारी, डॉ0 विनय डबराल, डॉ0 नगेन्द्र, डॉ0 सविता मोहन, डॉ0 नन्द किशोर., डॉ0 योगेंद्र नाथ शर्मा ‘अरुण’ और डॉ0 सुधाकर तिवारी सहित अनेक शिक्षाविदों द्वारा समी़क्षा ग्रंथों एवम्‌ पुस्तकों का प्रकाशन किया जा चुका है। डॉ0 ‘निशंक’ के साहित्य पर कई राष्ट्रीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालयों (गढ़वाल विश्वविद्यालय, कुमाऊं विश्वविद्यालय, सागर विश्वविद्यालय, मद्रास विश्वविद्यालय, हैंबर्ग विश्वविद्यालय जर्मनी, लखनऊ विश्वविद्यालय तथा मेरठ विश्वविद्यालय) में शोध कार्य हो चुका है और जारी है।

 

कविता संग्रह - 13

कहानी संग्रह - 14

उपन्यास - 12

व्यक्तित्व विकास - 4

बाल साहित्य - 6

खंडकाव्य - 1

पर्यटन/ संस्कृति - 7

डायरी/ संस्मरणयात्रा  - 6

 

बल्यावस्था

डॉ0 रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ का जन्म उत्तराखण्ड प्रदेश के अन्तर्गत जनपद पौड़ी के सुदूर स्थित ग्राम पिनानी में सन्‌ 1959 में एक अत्यन्त निर्धन परिवार में हुआ। इन्होंने बचपन से ही अनेक अभावों में अपना जीवन व्यतीत किया। ये बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि के थे।

 

शिक्षा दीक्षा

इन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा अपने गाँव स्थित विद्यालय से पूर्ण करने के पश्चात गाँव से 07 कि0मी0 की पैदल दूरी पर स्थित राजकीय हाईस्कूल (अब इण्टर कॉलेज) दमदेवल से रोज पैदल आ-जाकर हाईस्कूल की परीक्षा उर्त्तीण की। तत्पश्चात अपनी आगे की पढ़ाई के लिए आप हरिद्वार स्थित एक आश्रम में आए। जहाँ आश्रम के कार्य करते हुए आपने उच्च शिक्षा ग्रहण की। नेतृत्व के गुण आपमें बचपन से ही मौजूद थे।

          आप बचपन से ही राष्ट्रीय विचारधारा एवं मातृभाषा के प्रति प्रेरित रहे। आपने अपनी उच्च शिक्षा पूर्ण करने के पश्चात  एक अध्यापक तथा लेखक के रूप में जीवन यापन करने का निश्चय किया। लेखन कार्य के साथ-साथ आपने सरस्वती शिशु मन्दिर से अध्यापन के रूप में अपनी जीविका शुरू की। उसके पश्चात सरस्वती विद्या मन्दिरों में प्रधानाचार्य के रूप में उत्तरकाशी, देहरादून, पुरोला एवं ऊखीमठ आदि स्थानों पर नियुक्त रहे।

          वर्ष 1987 में आपने विद्या मन्दिर से अवकाश लेकर उत्तराखण्ड के पौड़ी गढ़वाल से ‘दैनिक सीमांत वार्ता’ अखबार का प्रकाशन प्रारम्भ किया और पत्रकारिता के माध्यम से प्रदेश एवं समाज की विभिन्न समस्यायें और जनपक्षीय मुद्दे उठाये। पहली बार आप वर्ष 1991 में भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर कर्णप्रयाग विधान सभा क्षेत्र से निर्वाचित होकर विधान सभा में पहुँचे। तत्पश्चात 1993 और फिर 1996 में लगातार तीन बार विजयी होकर हैट्रिक बनाई। आपके मृदुभाषी, तेज तर्रार व्यक्तित्व, कर्मठता एवं नेतृत्व क्षमता के कारण जनता में आप हमेशा लोकप्रिय रहे।

 

सफलता का मंत्र

समर्पण, अथक कड़ी मेहनत और बुद्धिमत्ता तथा भगवान पर विश्वास और पीड़ितों के प्रति लगाव उनके जीवन का मंत्र रहा है

साहित्यिक यात्रा

1983 में 'निशंक', 'समरपन' (कविता संग्रह) का पहला काम प्रकाशित हुआ। अब तक उनकी कुल पाँच दर्जन से अधिक किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं; 13 कविता संग्रह, 4 कहानी संग्रह, 2 उपन्यास, 3 यात्रा पुस्तकें, 6 बच्चों का साहित्य, 4 व्यक्तित्व विकास और आज भी, उनका लेखन जारी है।

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